सोमवार, 7 दिसंबर 2009

मुझे है,काम ईश्वर से, जगत रूठे तो रूठन दे

मुझे है,काम ईश्वर से, जगत रूठे तो रूठन दे |

कुटुम्ब परिवार सुत दारा, माल धन लाज लोकन की |
हरि के भजन करने से, अगर छूटे तो छूटन दे || (१)

बैठ संगत में संतन की, करूँ कल्याण में अपना |
लोग दुनिया के भोगों में, मौज लूटे तो लूटन दे || (२)

प्रभु का ध्यान धरने की, लगी दिल में लगन मेरे |
प्रीत संसार-विषयों से, अगर टूटे तो टूटन दे ||(३)

धरी सिर पाप की मटकी, मेरे गुरुदेव ने झटकी |
वो "ब्रह्मानंद" ने पटकी, अगर फूटे तो फूटन दे ||(४)

जय श्री रामजी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें